दुनिया के सबसे लंबे विवादित सीमा की कहानी Aksai Chine से लेकर तवांग तक जाने कहां-कहां भारत और चीन के बीच विवाद है।

भारत और चीन के बीच कई सालों से सीमा को लेकर विवाद है। दोनों के बीच जंग भी हो चुकी है और हाल ही में झड़प भी हो चुकी है। भारत और चीन दुनिया के सबसे लंबी विवादित सीमा को साझा करते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को तुरंत सुलझाने की जरूरत है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी मैगजीन न्यूज़वीक को एक इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत और चीन को सीमा विवाद को तत्काल सुलझा लेना चाहिए.

उन्होंने कहा है कि दोनों देशों के बीच विपक्षी बातचीत को बनाए रखने के लिए सीमाओं पर चल रही स्थिति को तुरंत सुलझाने की जरूरत है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्थाई और शांतिपूर्ण रिश्ते दोनों देशों के लिए नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

पीएम मोदी के इस बयान पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। चीन के मुख्यपत्र कहे जाने वाले जाने वाले ग्लोबल टाइम ने कहा है कि अगर भारत पीएम मोदी के बयान पर अमल करता है और चीन से सहमति जताता है तो भारत और चीन के रिश्ते सही दिशा में आगे बढ़ेगा.

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भारत और चीन के बीच दुनिया की सबसे लंबी विवादित सीमा है

भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर की लंबी सीमा है जो की 3 सेक्टर्स में बटी हुई है ईस्टर्न, मिडल एंड वेस्टर्न.

आप सबसे पहले बात करते हैं पूर्वी सेक्टर की जिसमें अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम की सीमा लगती है चीन से जिसकी लंबाई 1,346 किलोमीटर है.

वहीं दूसरा मिडिल सेक्टर हैं जिसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा लगती है जिसकी लंबाई 545 किलोमीटर है.

तीसरा सेक्टर है वेस्टर्न सेक्टर जो कि लद्दाख की सीमा से लगता है जिसकी लंबाई 1,597 किलोमीटर है.

भारत और चीन के बीच कई इलाकों को लेकर सीमा विवाद है जो कि कई सालों से चला आ रहा है लद्दाख के करीब 38,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में चीन का कब्जा है जिसे अक्साई चीन कहा जाता है। वही अरुणाचल प्रदेश के 90,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर भी चीन अपना दावा करता है.

इतना ही नहीं पाकिस्तान और चीन के बीच 2 मार्च 1963 को एक समझौता हुआ था जिसमें पीओके की 5,180 वर्ग किलोमीटर की जमीन को पाकिस्तान ने चीन को दे दिया था.

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आईए जानते हैं सीमा विवाद की पूरी कहानी

1865 में ब्रिटिश सर्वेयर डब्ल्यूएच जॉनसन भारत और तिब्बत के बीच एक सीमा रेखा खींची, इसके बाद 1897 में एक और सीमा रेखा खींची गई, इसमें अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया। इसे जॉनसन-आर्डाघ लाइन कहा जाता है.

इससे पहले 1893 में एक नई बॉर्डर लाइन खींची गई, इसे मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड लाइन कहा जाता है, इसमें अक्साई चिन का ज्यादातर हिस्सा चीनी क्षेत्र में दिखाया गया.

1947 में भारत जब आजाद हुआ तो उसने जॉनसन-आर्डाघ लाइन को सीमा माना, जबकि 1949 में चीन जब पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बना तो वो चाहता तो मैकार्टनी-मैकडोनाल्ड लाइन को सीमा मान सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. चीन की इस हरकत की वजह से कन्फ्यूजन बढ़ा और अक्साई चिन में सीमा को ‘डिमार्केटेड’ यानी ‘अचिन्हित’ के रूप में दिखाया गया.

1962 में चीन ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर लड़ाई शुरू कर दी, बाद में युद्धविराम के तहत चीन अरुणाचल से तो पीछे हट गया लेकिन अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया, अब तक अक्साई चिन पर चीन का अवैध कब्जा है.

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भारत के किन-किन हिस्सों पर चीन के साथ विवाद है?

1. पैंगोंग त्सो झील (लद्दाख): ये झील 134 किलोमीटर लंबी है जो हिमालय में करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है. इस झील का 44 किमी क्षेत्र भारत और करीब 90 किमी क्षेत्र चीन में पड़ता है. LAC भी इसी झील से गुजरती है. इस वजह से यहां कन्फ्यूजन बना रहता है और दोनों देशों के बीच यहां विवाद है.

2. गलवान घाटी (लद्दाख): गलवान घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच स्थित है. यहां पर LAC अक्साई चीन को भारत से अलग करती है. ये घाटी चीन के दक्षिणी शिन्जियांग और भारत के लद्दाख तक फैली हुई है. जून 2020 में गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी.

3. डोकलाम (भूटान): वैसे तो डोकलाम भूटान और चीन का विवाद है लेकिन ये सिक्किम सीमा के पास पड़ता है. ये एक तरह से ट्राई-जंक्शन है जहां से चीन भूटान और भारत नजदीक है. भूटान और चीन दोनों इस इलाके पर अपना दावा करते हैं. भारत भूटान के दावे का समर्थन करता है. 2017 में करीब ढाई महीने तक डोकलाम पर भारत-चीन के बीच तनाव था.

4. तवांग (अरुणाचल प्रदेश): अरुणाचल प्रदेश में पड़ने वाले तवांग पर चीन की नजरें हमेशा से रही हैं. तवांग बौद्धों का प्रमुख धर्मस्थल है. इसे एशिया का सबसे बड़ा बौद्ध मठ भी कहा जाता है. चीन तवांग को तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है. 1914 में जो समझौता हुआ था, उसमें तवांग को अरुणाचल का हिस्सा बताया गया था. 1962 की जंग में चीन ने तवांग पर कब्जा कर लिया था, लेकिन युद्धविराम के तहत उसे अपना कब्जा छोड़ना पड़ा था.

5. नाथू ला (सिक्किम): नाथू ला हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है. ये भारत के सिक्किम और दक्षिणी तिब्बत की चुम्बी घाटी को जोड़ता है. ये 14,200 फीट की ऊंचाई पर है. भारत के लिए ये इसलिए अहम है क्योंकि यहीं से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थयात्री गुजरते हैं. नाथू ला को लेकर भारत-चीन में कोई विवाद नहीं है. लेकिन यहां भी कभी-कभी भारत-चीन की सेनाओं में झड़पों की खबरें आती रही हैं.

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